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अब अख़बार सूरज सुबह मूर्ती डंका तुमसे अंबर में रोपण कर एक ही कहानी कायर मत बन में इस ख्वाबो वाली सपनों से... हमेशा जरा बचके ही रहना पगली यादोमें तोह हम हमेशा ही साथ रहेंगे सुगंध यादें तो दुनिया प्रेम स्त्री विमर्श

Hindi लेकिन अब हकीकत में मुमकिन नही... सुबह वाली चाय तोह मैं बन ही जाऊँगा Audios

द्वारा लिखित संदीप शर्मा, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश

द्वारा वाचन RAMAN SHARMA