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मैं कोई और नहीं बजता अंबर में शाम से गुपचुप बातें इन दिखावे वालें अपनों से... स्त्री विमर्श तुमसे तब सूरज मूर्ती प्यार की दीवानी अब तो खूबसूरत शाम गरीब नारी जीवन परमात्मा रोपण कर यादें

Hindi लेकिन अब हकीकत में मुमकिन नही... सुबह वाली चाय तोह मैं बन ही जाऊँगा Audios

द्वारा लिखित संदीप शर्मा, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश

द्वारा वाचन RAMAN SHARMA