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तब अख़बार लेकिन तू चाय के साथ वाली नमकिन नही... हो सके तोह दूर ही रहना मूर्ती इस ख्वाबो वाली सपनों से... हमेशा जरा बचके ही रहना पगली स्त्री विमर्श यादें रोमांस प्यार की दीवानी मधुर बजता चाय अदरक वाली गरीब जीवन अब सुबह तुमसे अंबर में रोपण कर सुगंध

Hindi लेकिन अब हकीकत में मुमकिन नही... सुबह वाली चाय तोह मैं बन ही जाऊँगा Audios

द्वारा लिखित संदीप शर्मा, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश

द्वारा वाचन RAMAN SHARMA